ध्रुवचर्याकीर्तनं / Dhruva-caryā-kīrtana
Account of Dhruva’s Course and Related Cosmological Ordering
व्युष्टायां तु रजन्यां वै ब्रह्मणो ऽव्यक्तजन्मनः / अव्याकृतमिदं त्वासीन्नैशेन तमसावृतम्
vyuṣṭāyāṃ tu rajanyāṃ vai brahmaṇo 'vyaktajanmanaḥ / avyākṛtamidaṃ tvāsīnnaiśena tamasāvṛtam
रात्रि के बीत जाने पर, अव्यक्त-जन्मा ब्रह्मा के समय यह समस्त जगत् अव्याकृत था और रात्रि के अन्धकार से आच्छादित था।