ध्रुवचर्याकीर्तनं / Dhruva-caryā-kīrtana
Account of Dhruva’s Course and Related Cosmological Ordering
वसंते कपिलः सूर्यो ग्रीष्मेर्ऽकः कनकप्रभः / श्वेतवर्णस्तु वर्षासु पाण्डुः शरदि भास्करः
vasaṃte kapilaḥ sūryo grīṣmer'kaḥ kanakaprabhaḥ / śvetavarṇastu varṣāsu pāṇḍuḥ śaradi bhāskaraḥ
वसंत में सूर्य कपिल (ताम्रवर्ण) होता है; ग्रीष्म में अर्क स्वर्ण-प्रभा वाला। वर्षा में वह श्वेतवर्ण होता है; और शरद में भास्कर पाण्डुवर्ण होता है।