ध्रुवचर्याकीर्तनं / Dhruva-caryā-kīrtana
Account of Dhruva’s Course and Related Cosmological Ordering
वसंते चैव ग्रीष्मे च शतैः स तपति त्रिभिः / वर्षास्वथो शरदि वै चतुर्भिश्च प्रवर्षति
vasaṃte caiva grīṣme ca śataiḥ sa tapati tribhiḥ / varṣāsvatho śaradi vai caturbhiśca pravarṣati
वसंत और ग्रीष्म में वह तीन सौ किरणों से तपाता है; और वर्षा तथा शरद् में चार सौ किरणों से वर्षा बरसाता है।