ध्रुवचर्याकीर्तनं / Dhruva-caryā-kīrtana
Account of Dhruva’s Course and Related Cosmological Ordering
परस्परानुप्रवेशादाप्यायेते परस्परम् / उत्तरे चैव भूम्यर्द्धे तथा ह्यग्निश्च दक्षिणे
parasparānupraveśādāpyāyete parasparam / uttare caiva bhūmyarddhe tathā hyagniśca dakṣiṇe
परस्पर में प्रवेश करने से वे एक-दूसरे को पुष्ट करते हैं। पृथ्वी के उत्तरी अर्धभाग में (एक का) और दक्षिण में अग्नि का (स्थान) है।