ध्रुवचर्याकीर्तनं / Dhruva-caryā-kīrtana
Account of Dhruva’s Course and Related Cosmological Ordering
दक्षिणायनमार्गस्थो यदा चरति रश्मिवान् / तदा सर्वग्रहाणां च सूर्यो ऽधस्तात्प्रसर्पति
dakṣiṇāyanamārgastho yadā carati raśmivān / tadā sarvagrahāṇāṃ ca sūryo 'dhastātprasarpati
जब किरणों से युक्त सूर्य दक्षिणायन के मार्ग में चलता है, तब वह समस्त ग्रहों के नीचे की ओर सरकता हुआ प्रतीत होता है।