अधोलोकवर्णनम् (Adholoka-varṇana) — Description of the Lower Worlds and Cosmographic Measures
संध्यां तु समुपासीनाः प्रक्षिपन्ति जलं सदा / ओङ्कारब्रह्मसंयुक्तं गायत्र्या चाभिमन्त्रितम्
saṃdhyāṃ tu samupāsīnāḥ prakṣipanti jalaṃ sadā / oṅkārabrahmasaṃyuktaṃ gāyatryā cābhimantritam
वे संध्या-उपासना में स्थित होकर सदा जल अर्पित करते हैं, जो ओंकार-ब्रह्म से संयुक्त और गायत्री से अभिमन्त्रित होता है।