प्लक्षद्वीपवर्णनम्
Description of Plakṣa-dvīpa
कृत एव च दुर्भिक्षं जराव्याधिभयं कुतः / तत्रापि पर्वताः पुण्याः सप्तैव मणिभूषणाः
kṛta eva ca durbhikṣaṃ jarāvyādhibhayaṃ kutaḥ / tatrāpi parvatāḥ puṇyāḥ saptaiva maṇibhūṣaṇāḥ
वहाँ दुर्भिक्ष तो मानो किया ही नहीं जाता; जरा और व्याधि का भय कहाँ? वहाँ सात ही पुण्य पर्वत हैं, जो मणियों से भूषित हैं।