प्लक्षद्वीपवर्णनम्
Description of Plakṣa-dvīpa
पृथिव्याद्यास्तु वाद्यन्तापरिच्छिन्नास्त्रयस्तु ते / गुणोपचयसारेण परिच्छेदो विशेषतः
pṛthivyādyāstu vādyantāparicchinnāstrayastu te / guṇopacayasāreṇa paricchedo viśeṣataḥ
पृथ्वी आदि (तत्त्व) आदि और अंत से असीमित हैं; वे तीन (गुण) हैं। गुणों के संचय के सार से ही विशेष रूप से उनकी सीमा-निर्धारण होता है।