प्लक्षद्वीपवर्णनम्
Description of Plakṣa-dvīpa
अनाद्यन्तां व्रजन्त्येव नैकजातिसमुद्भवाः / विचित्रा जगतः सा वै प्रकृतिर्ब्रह्मणः स्थिता
anādyantāṃ vrajantyeva naikajātisamudbhavāḥ / vicitrā jagataḥ sā vai prakṛtirbrahmaṇaḥ sthitā
अनेक जातियों से उत्पन्न प्राणी अनादि-अन्तहीन गति में ही चलते रहते हैं; जगत् की वह विचित्र प्रकृति ब्रह्म में स्थित है।