कैलास-मन्दाकिनी-स्वच्छोदा-लौहित्य-सरयू-उद्गमवर्णनम्
Kailāsa and the Origins of Mandākinī, Svacchodā, Lauhitya, and Sarayū
यूपा मणिमयास्तत्र वितताश्च हिरण्मयाः / तत्रेष्ट्वा तु गतः सिद्धिं शक्रः सर्वैः सुरैः सह
yūpā maṇimayāstatra vitatāśca hiraṇmayāḥ / tatreṣṭvā tu gataḥ siddhiṃ śakraḥ sarvaiḥ suraiḥ saha
वहाँ मणिमय यूप (यज्ञ-स्तम्भ) फैले हुए थे और स्वर्णमय भी थे। वहाँ यज्ञ करके शक्र (इन्द्र) समस्त देवताओं सहित सिद्धि को प्राप्त हुआ।