Priyavrata-vaṃśa and Saptadvīpa Vibhāga (प्रियव्रतवंशः सप्तद्वीपविभागश्च)
देवाश्चाष्टविधा ये च तस्मिन्मम्वन्तरे ऽधिपाः / ऋषयो मनवश्चैव सर्वे तुल्यप्रयोजनाः
devāścāṣṭavidhā ye ca tasminmamvantare 'dhipāḥ / ṛṣayo manavaścaiva sarve tulyaprayojanāḥ
उस मन्वंतर में जो आठ प्रकार के देव अधिपति होते हैं, तथा ऋषि और मनु भी—वे सब समान प्रयोजन वाले होते हैं।