अग्निनिचयः (Agninichaya) / The Accumulation of Sacred Fire & the Classification of Pitṛs by Time-Order
जामाता श्वशुरे तस्मिन्स्वभावात्तेजसि स्थितः / ततो ज्ञात्वा सती सर्वाः न्यवसंस्ताः पितुर्गृहे
jāmātā śvaśure tasminsvabhāvāttejasi sthitaḥ / tato jñātvā satī sarvāḥ nyavasaṃstāḥ piturgṛhe
वह जामाता अपने श्वशुर के प्रति स्वभाव से ही तेजस्वी रहा; यह जानकर सती अपनी सब बहनों के साथ पिता के घर में रहने लगी।