अग्निनिचयः (Agninichaya) / The Accumulation of Sacred Fire & the Classification of Pitṛs by Time-Order
ऋषय ऊचुः क एष भगवान् कालः सर्वभूतापहारकः / कस्य योनिः किमादिश्च किं सतत्त्वः किमात्मकः
ṛṣaya ūcuḥ ka eṣa bhagavān kālaḥ sarvabhūtāpahārakaḥ / kasya yoniḥ kimādiśca kiṃ satattvaḥ kimātmakaḥ
ऋषियों ने कहा—यह भगवान् काल कौन है, जो समस्त प्राणियों का अपहरण करने वाला है? इसकी योनि किसकी है, इसका आदि क्या है, इसका तत्त्व क्या है, और इसका स्वरूप क्या है?