अग्निनिचयः (Agninichaya) / The Accumulation of Sacred Fire & the Classification of Pitṛs by Time-Order
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते पूर्वभागे द्वितीये ऽनुषङ्गपादे अग्निनिचयो नाम द्वादशो ऽध्यायः सुत उवाच ब्रह्मणः सृजतः पुत्रान् पूर्वं स्वायंभुवेंऽतरे / गात्रेभ्यो जज्ञिरे तस्य मनुष्यासुरदेवताः
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte pūrvabhāge dvitīye 'nuṣaṅgapāde agninicayo nāma dvādaśo 'dhyāyaḥ suta uvāca brahmaṇaḥ sṛjataḥ putrān pūrvaṃ svāyaṃbhuveṃ'tare / gātrebhyo jajñire tasya manuṣyāsuradevatāḥ
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के वायु-प्रोक्त पूर्वभाग के द्वितीय अनुशंगपाद में ‘अग्निनिचय’ नामक बारहवाँ अध्याय। सूत बोले— स्वायम्भुव मन्वन्तर के आरम्भ में, ब्रह्मा के पुत्रों की सृष्टि करते समय, उनके अंगों से मनुष्य, असुर और देव उत्पन्न हुए।