Rudra-prasava-varṇana
The Manifestation and Naming of Rudra / Nīlalohita
इति श्री ब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते पूर्वभागे द्वितीये ऽनुषङ्गपादे रुद्रप्रसववर्णनं नाम नवमो ऽध्यायः ऋषिरुवाच अस्मिन्कल्पे त्वया नोक्तः प्रादुर्भावो महात्मनः / महादेवस्य रुद्रस्य साधकैरृषिभिः सह
iti śrī brahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte pūrvabhāge dvitīye 'nuṣaṅgapāde rudraprasavavarṇanaṃ nāma navamo 'dhyāyaḥ ṛṣiruvāca asminkalpe tvayā noktaḥ prādurbhāvo mahātmanaḥ / mahādevasya rudrasya sādhakairṛṣibhiḥ saha
इस प्रकार श्री ब्रह्माण्ड महापुराण के वायु-प्रोक्त पूर्वभाग के द्वितीय अनुशंगपाद में ‘रुद्र-प्रसव-वर्णन’ नामक नवम अध्याय। ऋषि बोले— हे महात्मन्! इस कल्प में महादेव रुद्र का साधक ऋषियों सहित जो प्रादुर्भाव हुआ, वह आपने नहीं कहा।