पितृसर्ग-श्राद्धप्रश्नाः
Pitri-Origins and Shraddha Queries
नास्तिको वाप्यधर्मो वा संकीर्मस्तस्करो ऽपि वा / नान्यत्र तारणं दानं योगेष्वाह प्रजापतिः
nāstiko vāpyadharmo vā saṃkīrmastaskaro 'pi vā / nānyatra tāraṇaṃ dānaṃ yogeṣvāha prajāpatiḥ
नास्तिक हो या अधर्मी, मिश्रित आचरण वाला हो या चोर भी—प्रजापति कहते हैं कि योगियों को दिया गया दान ही अन्यत्र नहीं, तारने वाला है।