पितृसर्ग-श्राद्धप्रश्नाः
Pitri-Origins and Shraddha Queries
एतानेव च मन्त्रज्ञान्भोजयेद्यः समागतान् / एकस्तान्स्नातकः प्रितः सर्वानर्हति तच्छृणु
etāneva ca mantrajñānbhojayedyaḥ samāgatān / ekastānsnātakaḥ pritaḥ sarvānarhati tacchṛṇu
जो आए हुए इन्हीं मंत्र-ज्ञ ब्राह्मणों को भोजन कराए, वह एक प्रसन्न स्नातक भी उन सबके समान पूज्य फल का अधिकारी होता है—यह सुनो।