पितृसर्ग-श्राद्धप्रश्नाः
Pitri-Origins and Shraddha Queries
ज्ञानानि भूतभव्यानि लोका वेदाश्च सर्वशः / योगामृतास्तदा सृष्टा ब्रह्मणा लोकचक्षुषा
jñānāni bhūtabhavyāni lokā vedāśca sarvaśaḥ / yogāmṛtāstadā sṛṣṭā brahmaṇā lokacakṣuṣā
भूत और भविष्य के ज्ञान, समस्त लोक और वेद—ये सब; तथा योग का अमृत भी, लोकचक्षु ब्रह्मा द्वारा तब रचे गए।