पितृसर्ग-श्राद्धप्रश्नाः
Pitri-Origins and Shraddha Queries
सूत उवाच अत्र वो कीर्तयिष्यामि यथाप्रज्ञं यथाश्रुतम् / मन्वन्तरेषु जायन्ते पितरो देवसूनवः
sūta uvāca atra vo kīrtayiṣyāmi yathāprajñaṃ yathāśrutam / manvantareṣu jāyante pitaro devasūnavaḥ
सूत ने कहा—यहाँ मैं तुम्हें अपनी बुद्धि और श्रुति के अनुसार वर्णन करूँगा; मन्वन्तरों में पितर देवों के पुत्र रूप में उत्पन्न होते हैं।