Jayantī–Kāvyā (Śukra) Saṃvāda: Varadāna and the Ten-Year Concealment
न शक्यमन्यथाकर्त्तुं दिष्टं हि बलवत्तरम् / संज्ञा प्रनष्टा या चेयं कामं तां प्रतिलप्स्यथ
na śakyamanyathākarttuṃ diṣṭaṃ hi balavattaram / saṃjñā pranaṣṭā yā ceyaṃ kāmaṃ tāṃ pratilapsyatha
इसे अन्यथा करना संभव नहीं; क्योंकि दैव-नियति अधिक बलवान है। जो यह चेतना (संज्ञा) नष्ट हुई है, उसे तुम अवश्य फिर प्राप्त करोगे।