Jayantī–Kāvyā (Śukra) Saṃvāda: Varadāna and the Ten-Year Concealment
काव्यो ऽहं वो गुरुर्दैत्या मद्रूपो ऽयं बृहस्पतिः / संमोहयति रूपेण मामकेनैष वो ऽसुराः
kāvyo 'haṃ vo gururdaityā madrūpo 'yaṃ bṛhaspatiḥ / saṃmohayati rūpeṇa māmakenaiṣa vo 'surāḥ
“हे दैत्यों, मैं काव्य (शुक्र) तुम्हारा गुरु हूँ; यह बृहस्पति मेरे ही रूप में है। हे असुरो, यह मेरे रूप से तुम्हें मोहित कर रहा है।”