Jayantī–Kāvyā (Śukra) Saṃvāda: Varadāna and the Ten-Year Concealment
बृहस्पतिस्तु संरुद्धं ज्ञात्वा काव्यं वरेण ह / प्रीत्यर्थे दश वर्षाणि जयन्त्या हितकाम्यया
bṛhaspatistu saṃruddhaṃ jñātvā kāvyaṃ vareṇa ha / prītyarthe daśa varṣāṇi jayantyā hitakāmyayā
बृहस्पति ने वर के प्रभाव से काव्य के रोके जाने को जानकर, हित चाहने वाली जयन्ती के प्रेम हेतु दस वर्षों तक (वहाँ) निवास किया।