स तत्रवासयामास श्वफल्कं परमार्चितम् / श्वफल्कपरिवासेन प्रावर्षत्पाकशासनः
sa tatravāsayāmāsa śvaphalkaṃ paramārcitam / śvaphalkaparivāsena prāvarṣatpākaśāsanaḥ
तब काशिराज ने परम पूज्य श्वफल्क को वहाँ निवास कराया; श्वफल्क के रहने से ही इन्द्र ने वर्षा की।