Yadu-vaṃśa and the Haihaya Line: From Yadu to Kārtavīrya Arjuna
कृतौजाश्च चतुर्थो ऽभूत्कृतवीर्यात्मजोर्ऽजुनः / जज्ञे बाहुसहस्रेण सप्तद्वीपेश्वरो नृपः
kṛtaujāśca caturtho 'bhūtkṛtavīryātmajor'junaḥ / jajñe bāhusahasreṇa saptadvīpeśvaro nṛpaḥ
चौथा कृतौजा था; कृतवीर्य का पुत्र अर्जुन (कार्तवीर्य) हुआ। वह सहस्र भुजाओं वाला, सप्तद्वीपों का स्वामी नृप उत्पन्न हुआ।