Yadu-vaṃśa and the Haihaya Line: From Yadu to Kārtavīrya Arjuna
कार्त्तवीर्यस्य यो जन्म कथयेदिह धीमतः / वर्द्धन्ते विभवाश्शश्वद्धर्मश्चास्य विवर्द्धते
kārttavīryasya yo janma kathayediha dhīmataḥ / varddhante vibhavāśśaśvaddharmaścāsya vivarddhate
जो बुद्धिमान यहाँ कार्त्तवीर्य के जन्म का वर्णन करता है, उसके ऐश्वर्य सदा बढ़ते हैं और उसका धर्म भी निरन्तर बढ़ता है।