Yadu-vaṃśa and the Haihaya Line: From Yadu to Kārtavīrya Arjuna
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते मध्यमभागे तृतीय उपोद्धातपादे अष्टषष्टितमो ऽध्यायः // ६८// सूत उवाच यदोर्वंशं प्रवक्ष्यामि ज्येष्ठस्योत्तमतेजसः / विस्तरेणानुपूर्व्या च गदतो मे निबोधत
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte madhyamabhāge tṛtīya upoddhātapāde aṣṭaṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ // 68// sūta uvāca yadorvaṃśaṃ pravakṣyāmi jyeṣṭhasyottamatejasaḥ / vistareṇānupūrvyā ca gadato me nibodhata
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के वायुप्रोक्त मध्यमभाग के तृतीय उपोद्धातपाद में अड़सठवाँ अध्याय। सूतजी बोले— ज्येष्ठ, उत्तम तेजस्वी यदु के वंश का मैं विस्तार से और क्रमपूर्वक वर्णन करूँगा; तुम मेरे वचन को ध्यान से सुनो।