इक्ष्वाकुवंशकीर्त्तनम्
Ikṣvāku Lineage Proclamation; Nimi–Mithilā/Videha Genealogy
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते मध्यमभागे तृतीय उपोद्धात पादे भार्गवचरिते इक्ष्वाकुवंशकीर्त्तनं नाम त्रिषष्टितमो ऽध्यायः // ६३// सूत उवाच अनुजस्य विकुक्षेस्तु निमेर्वंशं निबोघत / यो ऽसौ निवेशयामास पुरं देवपुरोपमम्
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte madhyamabhāge tṛtīya upoddhāta pāde bhārgavacarite ikṣvākuvaṃśakīrttanaṃ nāma triṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ // 63// sūta uvāca anujasya vikukṣestu nimervaṃśaṃ niboghata / yo 'sau niveśayāmāsa puraṃ devapuropamam
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के वायुप्रोक्त मध्यमभाग के तृतीय उपोद्धातपाद, भार्गवचरित में ‘इक्ष्वाकुवंश-कीर्तन’ नामक तिरसठवाँ अध्याय है। सूत बोले—विकुक्षि के अनुज के निमि-वंश को सुनो; उसी ने देवपुर के समान एक नगर बसाया।