गान्धर्वमूर्छनालक्षणवर्णनम्
Description of Gandharva Mūrchanā Characteristics
प्राकृते वैकृते चैव गान्धारः स प्रयुज्यते / पदस्यात्ययरूपन्तुसप्तरूपन्तुकौशिकीम्
prākṛte vaikṛte caiva gāndhāraḥ sa prayujyate / padasyātyayarūpantusaptarūpantukauśikīm
प्राकृत और वैकृत—दोनों प्रकारों में गान्धार का प्रयोग होता है; पद का ‘अत्यय’ रूप तथा कौशिकी का ‘सप्त’ रूप कहा गया है।