गान्धर्वमूर्छनालक्षणवर्णनम्
Description of Gandharva Mūrchanā Characteristics
चतुर्विधमिदं ज्ञेय मलङ्कारप्रयोजनम् / यथात्मनो ह्यलङ्कारो विपयस्तो विगर्हितः
caturvidhamidaṃ jñeya malaṅkāraprayojanam / yathātmano hyalaṅkāro vipayasto vigarhitaḥ
मल-अलंकार का प्रयोजन चार प्रकार का जानना चाहिए। क्योंकि अपने स्वभाव के विरुद्ध किया गया अलंकार उलटा और निंदित होता है।