गान्धर्वमूर्छनालक्षणवर्णनम्
Description of Gandharva Mūrchanā Characteristics
कुमारं संपरं विद्धि द्विस्तरं वामनं गतः / एष वै एष चैवस्यकुतरेकः कुलाधिकः
kumāraṃ saṃparaṃ viddhi dvistaraṃ vāmanaṃ gataḥ / eṣa vai eṣa caivasyakutarekaḥ kulādhikaḥ
कुमार को संपर जानो; वह द्विस्तर होकर वामन-भाव को प्राप्त होता है। यही वह है—इसी में कुल की श्रेष्ठता का एक विशेष संकेत है।