धर्मयुक्तमिदं वाक्यं पुत्रकामं प्रजापतिम् / मित्रावरुणयोरंशे जातास्मि वदतां वर
dharmayuktamidaṃ vākyaṃ putrakāmaṃ prajāpatim / mitrāvaruṇayoraṃśe jātāsmi vadatāṃ vara
यह वचन धर्मयुक्त है। पुत्र की कामना करने वाले प्रजापति से—हे वाणी में श्रेष्ठ—मैं मित्र और वरुण के अंश से उत्पन्न हुई हूँ।