Bhārgavaṃ prati Varuṇāgamanaṃ
Varuṇa’s Approach to Bhārgava/Paraśurāma
ततो निरूप्य सीमानं दर्शयानो महीपते / स्रुवं जग्राह मतिमान्क्षप्तुकामो जलाशये
tato nirūpya sīmānaṃ darśayāno mahīpate / sruvaṃ jagrāha matimānkṣaptukāmo jalāśaye
तब हे महीपते, सीमा का निर्धारण कर दिखाते हुए बुद्धिमान राम ने जलाशय के पास फेंकने की इच्छा से स्रुव (हवन-चम्मच) उठा लिया।