गङ्गानयनम् (Gaṅgānayana) — “The Bringing/Leading of the Gaṅgā”
तं तदाश्रममासाद्य ब्रह्मघोषेण नादितम् / विविशुर्त्दृष्टमनसो यथावृद्धपुरस्सरम्
taṃ tadāśramamāsādya brahmaghoṣeṇa nāditam / viviśurtdṛṣṭamanaso yathāvṛddhapurassaram
उस ब्रह्मघोष से गूँजते हुए आश्रम को प्राप्त होकर, वे सब एकाग्रचित्त हुए, और जैसे वृद्धजन आगे हों वैसे क्रम से भीतर प्रविष्ट हुए।