अश्वमोचनम् (Aśvamocanam) — “The Release/Recovery of the Sacrificial Horse”
भयभीतास्ततो देवाः समेत्य दिवि संस्थिताः / तुष्टुवुस्ते महात्मानं क्रोधाग्निशमनार्थिनः
bhayabhītāstato devāḥ sametya divi saṃsthitāḥ / tuṣṭuvuste mahātmānaṃ krodhāgniśamanārthinaḥ
तब भय से काँपते हुए, स्वर्ग में स्थित देवता एकत्र होकर क्रोधाग्नि के शमन की कामना से उस महात्मा की स्तुति करने लगे।