अश्वमोचनम् (Aśvamocanam) — “The Release/Recovery of the Sacrificial Horse”
मुहूर्त्तमिव ते राजन्साध्वसं परमं गताः / ततो ऽयमश्वहर्त्तेति सागरा कालचोदिताः
muhūrttamiva te rājansādhvasaṃ paramaṃ gatāḥ / tato 'yamaśvahartteti sāgarā kālacoditāḥ
हे राजन्, वे एक मुहूर्त भर परम भय को प्राप्त हुए; फिर काल से प्रेरित होकर बोले—“यही अश्व-हर्ता है।”