अश्वमोचनम् (Aśvamocanam) — “The Release/Recovery of the Sacrificial Horse”
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते मध्यमभागे तृतीय उवोद्धातपादे सगरवरिते ऽश्वमोचनं नाम द्विपञ्चाशत्तमो ऽध्यायः // ५२// जैमिनिरुवाच तेषु तत्र निविष्टेषु वासवेन प्रचोदितः / जहारं तुरगं वायुस्तत्क्षणेन रसातलम्
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte madhyamabhāge tṛtīya uvoddhātapāde sagaravarite 'śvamocanaṃ nāma dvipañcāśattamo 'dhyāyaḥ // 52// jaiminiruvāca teṣu tatra niviṣṭeṣu vāsavena pracoditaḥ / jahāraṃ turagaṃ vāyustatkṣaṇena rasātalam
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के वायुप्रोक्त मध्यमभाग में सगर-चरित का ‘अश्वमोचन’ नामक बावनवाँ अध्याय है। जैमिनि बोले—जब वे वहाँ बैठे थे, तब इन्द्र के प्रेरित वायु ने उसी क्षण घोड़े को उठाकर रसातल में ले गया।