Asamañjasa-tyāga (Abandoning Asamañjasa) — Sagara-carita Continuation
विध्वस्यमाने सुभृशं सागरैर्वरदर्पितैः / प्रक्षोभं परमं जग्मुर्देवासुरमहोरगाः
vidhvasyamāne subhṛśaṃ sāgarairvaradarpitaiḥ / prakṣobhaṃ paramaṃ jagmurdevāsuramahoragāḥ
वरदान से दर्पित सागरों द्वारा जब अत्यन्त विध्वंस होने लगा, तब देव, असुर और महोरग—सब परम क्षोभ को प्राप्त हो गए।