सगरस्यौर्वाश्रमगमनम्
Sagara’s Journey to Aurva’s Hermitage
ततस्तद्रक्षको ऽभ्येत्य पिशाचः प्राह तं तदा / क्षुधितो ऽहं चिरादस्मिन्निवसन्निधिपालकः
tatastadrakṣako 'bhyetya piśācaḥ prāha taṃ tadā / kṣudhito 'haṃ cirādasminnivasannidhipālakaḥ
तब उस निधि का रक्षक पिशाच पास आकर बोला—‘मैं बहुत समय से यहाँ रहने वाला निधि-पालक हूँ और भूखा हूँ।’