सगरस्यौर्वाश्रमगमनम्
Sagara’s Journey to Aurva’s Hermitage
ततस्ते भगवानाह भवतीभ्यां मया पुनः / राज्ञश्चप्रियकामेन वरो दत्तो ऽयमीप्सितः
tataste bhagavānāha bhavatībhyāṃ mayā punaḥ / rājñaścapriyakāmena varo datto 'yamīpsitaḥ
तब भगवान्-तुल्य मुनि ने कहा—“तुम दोनों को, और राजा की प्रिय इच्छा के अनुसार, यह इच्छित वर मैंने प्रदान कर दिया है।”