सगरस्यौर्वाश्रमगमनम्
Sagara’s Journey to Aurva’s Hermitage
तदिदं दुःशमत्यर्थमनिवार्यं मनोगतम् / नानयो ऽपहर्त्तां लोकंऽस्मिन् ममेति त्वामुपागतः
tadidaṃ duḥśamatyarthamanivāryaṃ manogatam / nānayo 'paharttāṃ lokaṃ'smin mameti tvāmupāgataḥ
यह मन में उठी हुई अत्यन्त दुःसह और रोकी न जा सकने वाली बात है। इस लोक में ‘यह मेरा है’—इसको कोई और हर नहीं सकता; इसी हेतु मैं आपके पास आया हूँ।