सगरदिग्विजयः
Sagara’s World-Conquest / Digvijaya
प्रजाश्च सर्ववर्णेषु यथाश्रेष्ठानुवर्त्तिनः / वर्णाश्चैवानुलोम्येन तद्वदर्थेषु च क्रमात्
prajāśca sarvavarṇeṣu yathāśreṣṭhānuvarttinaḥ / varṇāścaivānulomyena tadvadartheṣu ca kramāt
सब वर्णों में प्रजा अपने-अपने श्रेष्ठ जनों का अनुसरण करने वाली थी; और वर्ण भी अनुलोम क्रम से, वैसे ही अर्थ-व्यवहार में भी क्रमशः स्थित थे।