सगरदिग्विजयः
Sagara’s World-Conquest / Digvijaya
जेष्यन्ति किल सत्पुत्रे जाते वंशद्वये ऽपि च / अनपत्यतयाहं तु पुत्रिणां या भवेद्गतिः
jeṣyanti kila satputre jāte vaṃśadvaye 'pi ca / anapatyatayāhaṃ tu putriṇāṃ yā bhavedgatiḥ
सत्पुत्र के जन्म से दोनों वंशों में भी जय होती है; पर मैं तो निःसंतान होने से पुत्रहीनों की जो गति होती है, वही पाऊँगा।