सगरदिग्विजयः
Sagara’s World-Conquest / Digvijaya
संकेताविषयान्तराभ्युपगमाः सर्वे ऽपि सोपायनाः कृत्वा सैन्यनिवेशनानि परितः पुर्याः पृथक् पार्थिवाः / द्रष्टुं काङ्क्षितराजकाः सतनयाविज्ञापयन्तो मुहुर्द्वास्थैरेव नरेश्वराय सुचिरं वत्स्यन्तमन्तःपुरे
saṃketāviṣayāntarābhyupagamāḥ sarve 'pi sopāyanāḥ kṛtvā sainyaniveśanāni paritaḥ puryāḥ pṛthak pārthivāḥ / draṣṭuṃ kāṅkṣitarājakāḥ satanayāvijñāpayanto muhurdvāsthaireva nareśvarāya suciraṃ vatsyantamantaḥpure
सब राजाओं ने संकेतानुसार अन्य-अन्य विषयों की स्वीकृति उपहारों सहित कर ली; और नगर के चारों ओर अलग-अलग अपनी सेनाओं के शिविर स्थापित किए। वे अपने पुत्रों सहित इच्छित राजा के दर्शन की कामना से बार-बार द्वारपालों द्वारा नरेश्वर को निवेदन भेजते रहे, मानो वह दीर्घकाल तक अन्तःपुर में ही ठहरा हो।