सगरदिग्विजयः
Sagara’s World-Conquest / Digvijaya
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते मध्यमभागे तृतीय उपोद्धातपादे सगरदिग्विजयो नामैकोनपञ्चाशत्तमो ऽध्यायः // ४९// जैमिनिरुवाच एवं स राजा विधिवत्पालयामास मेदिनीम् / सप्तद्वीपवतीं सम्यक्साक्षाद्धर्म इवापरः
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte madhyamabhāge tṛtīya upoddhātapāde sagaradigvijayo nāmaikonapañcāśattamo 'dhyāyaḥ // 49// jaiminiruvāca evaṃ sa rājā vidhivatpālayāmāsa medinīm / saptadvīpavatīṃ samyaksākṣāddharma ivāparaḥ
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के वायु-प्रोक्त मध्यमभाग के तृतीय उपोद्धातपाद में ‘सगर-दिग्विजय’ नामक उनचासवाँ अध्याय समाप्त हुआ। जैमिनि बोले—उस राजा ने विधिपूर्वक सात द्वीपों वाली पृथ्वी का उत्तम पालन किया, मानो वह दूसरा धर्म ही हो।