हिरण्यकशिपुजन्म-तपः-वरप्रभावः
Birth, Austerity, and Boon-Power of Hiraṇyakaśipu
न हन्तव्यो न हन्तव्य इत्येवं दितिरब्रवीत् / निष्पपात ततो वज्री मातुर्वचनगौरवात्
na hantavyo na hantavya ityevaṃ ditirabravīt / niṣpapāta tato vajrī māturvacanagauravāt
'मत मारो, मत मारो', ऐसा दिति ने कहा। तब माता के वचनों के आदर के कारण वज्रधारी (इंद्र) बाहर निकल आए।