हिरण्यकशिपुजन्म-तपः-वरप्रभावः
Birth, Austerity, and Boon-Power of Hiraṇyakaśipu
तामालभ्य स्वभवनं जगाम भगवानृषिः / गते भर्त्तरि सा देवी दितिः परमहर्षिता
tāmālabhya svabhavanaṃ jagāma bhagavānṛṣiḥ / gate bharttari sā devī ditiḥ paramaharṣitā
उसे स्पर्श कर भगवान् ऋषि अपने आश्रम को चले गए। पति के चले जाने पर देवी दिति अत्यन्त हर्षित हुई।