हिरण्यकशिपुजन्म-तपः-वरप्रभावः
Birth, Austerity, and Boon-Power of Hiraṇyakaśipu
महिम्ना व्याप्य संतस्थे बहुमूर्त्तिरमित्रजित् / स एव तपति व्योम्नि चन्द्रसूर्यत्वमास्थितः
mahimnā vyāpya saṃtasthe bahumūrttiramitrajit / sa eva tapati vyomni candrasūryatvamāsthitaḥ
वह शत्रुजयी बहुरूपी अपने महिमा से सबमें व्याप्त होकर स्थित हो गया। वही आकाश में चन्द्र और सूर्य का रूप धारण कर तपने लगा।