Sagarapratijñāpālana (Fulfilment of Sagara’s Vow) — Keśinī-vivāha and Royal Return
फलमल्पमपि प्रीत्यै स्यादगस्याधिरोपितुः / जैमिनिरुवाच एवं संभावितः सम्यक्सगेरण महामुनिः
phalamalpamapi prītyai syādagasyādhiropituḥ / jaiminiruvāca evaṃ saṃbhāvitaḥ samyaksageraṇa mahāmuniḥ
अगस्त्य को प्रतिष्ठित करने वाले के लिए अल्प फल भी प्रसन्नता का कारण होता है। जैमिनि बोले—इस प्रकार सगर ने महामुनि का यथोचित सत्कार किया।