Vasiṣṭha-gamana
Vasiṣṭha’s Departure / The Episode of Sagara
निघ्नन्दृप्ताननेकान्द्विपतुरगरथव्यूहसंभिन्नवीरान्सद्यः शोभां दधानो ऽसुरनिकरचमूर्निघ्नतश्चन्द्रमौलिः / दूरादेवाभिशंसन्नरिनगरनिरोधेषु कर्माभिषङ्गे तेषां शीघ्रापयानक्षणमभिदिशति प्राणिधैर्यं विधत्ते
nighnandṛptānanekāndvipaturagarathavyūhasaṃbhinnavīrānsadyaḥ śobhāṃ dadhāno 'suranikaracamūrnighnataścandramauliḥ / dūrādevābhiśaṃsannarinagaranirodheṣu karmābhiṣaṅge teṣāṃ śīghrāpayānakṣaṇamabhidiśati prāṇidhairyaṃ vidhatte
अनेक दर्पितों को रौंदता, हाथी-घोड़े-रथों की व्यूह-रचना से विदीर्ण वीरों को गिराता, असुर-सेना का संहार करता चन्द्रमौलि तत्काल शोभा धारण करता था; और दूर से ही शत्रु-नगरों के घेराव के कर्म में प्रवृत्त होकर वह उनके शीघ्र प्रस्थान का क्षण बताता और प्राणियों में धैर्य स्थापित करता।