Samantapañcaka at Kurukṣetra: Paraśurāma’s Tīrtha-Creation and Pitṛ-Rites (समन्तपञ्चक-तीर्थप्रशंसा)
तद्वृत्तान्तमशेषेण मया ते समुदीरितम् / एतच्च सर्वमाख्यातं व्रतानामुत्तमं तव
tadvṛttāntamaśeṣeṇa mayā te samudīritam / etacca sarvamākhyātaṃ vratānāmuttamaṃ tava
उस समस्त वृत्तान्त को मैंने तुम्हें पूर्ण रूप से कह दिया। और यह भी बताया कि व्रतों में तुम्हारा यह व्रत सर्वोत्तम है।